Monday, 13 July, 2009

चित्र पहेली 5 : क्या कभी देखी है आपने ऍसी त्रिभुजाकार चोटी ?

मुसाफ़िर हूँ यारों पर कुछ दिनों पहले हिमालय की अन्नपूर्णा पर्वत श्रृंखला के बीच पोखरा, नेपाल के पास मछली के आकार की पूँछ वाली चोटी को देखने का अनुभव मैंने
आपसे साझा किया था। पर आज जिस पहाड़ी चोटी को आप को पहचानना है वो भारत में अवस्थित है पर इसका आकार प्रकार भी अचंभित कर देने वाला है।

इस चोटी की खासियत ये है कि इसका आकार अपने आधार से शीर्ष तक पहुँचते पहुँचते समानुपातिक ढ़ंग से इस तरह घटता है कि ऊँचाई से ये पहाड़ी एक त्रिभुज की तरह दिखती है। मानसून के दौर में इस चोटी के आस पास की छटा देखने वाली होती है। तैरते बादलों के बीच तब ये चोटी ढक सी जाती है।

(चित्र साभार इंटरनेट, छायाकार का नाम पता नहीं।)
तो आपको इस चित्र को देख कर आज बताना है इस चोटी का नाम क्या है और ये कहाँ अवस्थित है। हमेशा की तरह सही जवाब तक पहुँचने के लिए संकेत हाजिर हैं।


संकेत 1 : ये चोटी भारत के पश्चिमी घाट में है और इसकी ऊँचाई १००० मीटर से थोड़ी कम है।
संकेत 2 : हिंदी चिट्ठाजगत के एक चिर परिचित कवि / शायर का घर इस चोटी से तकरीबन घंटे भर की दूरी पर है।:)
संकेत 3: इस चोटी का नाम संगीत के एक प्रसिद्ध घराने से मिलता जुलता है।


तो हैं ना मज़ेदार संकेत ! वैसे इस बार पिछली बार से विपरीत एक से ज्यादा सही जवाब आने की आशा है क्योंकि मुझे यक़ीन है कि आप में से कुछ ने इस चोटी को देखा जरूर होगा। मेरे ख्याल से इन संकेतों की सहायता से उत्तर तक शीघ्र ही पहुँच जाएँगे तो देर किस बात की जल्दी लिखिए अपना जवाब। आपके उत्तर हमेशा की तरह माडरेशन में रखे जाएँगे। सही जवाब 16 जुलाई की सुबह इसी पोस्ट में बताए जाएँगे।

Wednesday, 1 July, 2009

राशिद मियाँ सही कहा आपने, वाकई बादलों के ऊपर रब की दुनिया है !

कहते हैं आसमान की छत पर बादलों की चादर ओढ़े कोई फरिश्ता बसता है। अब कल ही देखिए ना अनुराग की ये पोस्ट पढ़ रहा था राशिद मियाँ प्रेसवाले के बारे में जो उनसे पूछ बैठे हैं...
आप तो हवाई जहाज में कई बार बैठे होगे .आसमान में...
हाँ क्यों ?
कुछ नहीं......वे हंसते हुए कपडे उठाते है. हमारी बेगम कहती है .. रब ऊपर बैठा है …फिर एक ठंडी सांस ..…"पगली है " ...

"मुए जहाजो से कहो कभी हार्न बजाये......

अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है
"

क्या खूब कहा अनुराग ने ! सोचता हूँ गर राशिद मियाँ ने यही सवाल मुझ से पूछा होता तो मैं क्या कहता ! नहीं, नहीं, कहने को कुछ नहीं बस उन्हें दिखाता कि आसमाँ की उस ऊँचाई पर बादलों के दूर दूर तक फैले श्वेत बिछौने पर उनके ख़ुदा को ढूँढना उतना ही मुश्किल है जितना की इस रंग रंगीली दुनिया में।

तो आइए दिखाएँ आपकों रब के साम्राज्य की एक झलक। इनमें से अधिकांश तसवीरें मैंने करीब दो साल पहले कोलकाता से राँची से आते हुए खींची थी। चित्रों को बड़ा करने के लिए उन पर क्लिक करें।











इन नज़ारों को चलता फिरता देखना चाहते हों तो यहाँ देखें...


video

वैसे अब तो आपको भी यकीन आ गया होगा ना कि कि रब की दुनिया वाकई पाक है !

Wednesday, 24 June, 2009

चित्र पहेली 4 का उत्तर : क्या आपने सही पहचाना था इस हिल स्टेशन को सुबह और रात की इन तसवीरों के ज़रिए...

हमारे देश में कितने ही खूबसूरत हिल स्टेशन हैं। कुछ तो पर्यटन और शहरीकरण की मार की वज़ह से अपना नैसर्गिक सौंदर्य खो चुके हैं तो कुछ खो जाने की प्रक्रिया में हैं। अब जिस हिल स्टेशन की बात मैं कर रहा हूँ वहाँ की हरियाली अब भी मन को मोहती है। अब यही देखिए सुबह की तेज़ धूप आ चुकी है पर ये शहर उमड़ती घुमड़ती धुंध के आलिंगन से अपने आप को मुक्त नहीं कर पाया है।



ऊपर का चित्र तो शहर की बाहरी परिधि से लिया गया है, पर रात में ये शहर एक अलग सी तसवीर प्रस्तुत करता है। इस चकाचौंध से ये तो समझ ही गए होंगे आप कि यहाँ भी शहरीकरण तेज़ी से पाँव पसार रहा है।


रात्रि चित्र के छायाकार हैं आर सी फनाई। वैसे तो अब तक आप बूझ ही गए होंगे कि आज का सवाल क्या है ? जी हाँ आपको बताना है कि ये खूबसूरत जगह कौन सी है ? पिछली पहेली की तरह ये कठिन ना हो जाए इसलिए चार संकेत हाज़िर हैं।




संकेत 1,4 : ये जगह एक राज्य की राजधानी है। १८९५ में ये राज्य ब्रिटिश भारत का पहली बार हिस्सा बना।
जी हाँ ऍजल (Aizwal) मिज़ोरम की राजधानी है। मिज़ो पहाड़ियाँ एक आधिकारिक आदेश के तहत १८९५ में ब्रिटिश भारत का हिस्सा बनीं। १८९८ में उत्तर और दक्षिण की पहाड़ियों को लुशामिला के साथ मिला ऍजल को मुख्यालय बनाया गया।

संकेत 2 : आदमखोर बाघ, खूनी तेंदुओं और मनचले हाथियों से गाँवों की तबाही के किस्से तो आपने पहले भी सुने होंगे, पर इस राज्य के लोगों को एक बार तबाह किया था चूहों ने !
मिजोरम में १९५९ में भीषण अकाल पड़ा। इस अकाल की वज़ह थी बाँस के पेड़ों में फूलों का आना। कहते हैं इन फूलों को खाने से चूहों की संख्या में जबरदस्त वृद्धि होती है। और बढ़े हुए चूहों ने अपनी भूख शांत करने के लिए लहलहाते खेतों पर आक्रमण कर उनका सफाया कर दिया। इस त्रासदी से निपटने के लिए मिजो नेशनल फैमिन फ्रंट (MNFF) का गठन हुआ जो अकाल के समय के अपने कार्यों की वज़ह से काफी प्रचलित हुआ। बाद में सरकारी उपेक्षा की शिकायत की बिना पर इस संगठन ने अलगाववाद का रास्ता चुना और यहाँ के लोकप्रिय नेता लालडेंगा नेतृत्व में इसका नाम मिजो नेशनल फ्रंट (MNF) पड़ा।

संकेत 3 : यहाँ की लोककथाओं पर अगर विश्वास करें तो आपको ये जान कर आश्चर्य होगा कि यहाँ के लोग इस संसार में पदार्पित हुए पहाड़ की चट्टानों के अंदर से।
इतिहास भले ही मिजो लोगों के पूर्वजों को बर्मा चीन सीमा के समीपवर्ती प्रांत से विस्थापित लोगों में शुमार करता है पर प्रचलित मिज़ो लोककथाओं में इस बड़ी चट्टान का नाम छिनलुंग बताते हैं।



मेरे ख्याल से इन संकेतों की सहायता से उत्तर तक शीघ्र ही पहुँच जाएँगे तो देर किस बात की जल्दी लिखिए अपना जवाब। आपके उत्तर हमेशा की तरह माडरेशन में रखे जाएँगे।

आइए देखें किसने दिया इकलौता सही जवाब:.

आप में से बहुत लोग ऍजल (Aizwal) के रात्रि चित्र को देख कर भ्रमित हो गए। दरअसल सभी हिल स्टेशन पर ऊँचाई से लिए गए चित्र बहुत हद तक एक जैसे लगते हैं। जिस तरह के संकेत थे उससे उत्तरपूर्वी राज्यों की ओर ध्यान जाना चाहिए था और गया भी बहुत लोगों जैसे मनीषा, समीर लाल और विवेक रस्तोगी का। पर चूहे वाले संकेत से अभिषेक ओझा सही उत्तर देने में सफल हो गए क्योंकि उन्होंने पिछले साल बाँस के फूलों की वज़ह से मिजोरम में आए अकाल के बारे में लिखा थाअभिषेक ओझा को हार्दिक बधाई और साथ ही आप सब का बेहद शुक्रिया इतनी जोर शोर के साथ इस पहेली में भाग लेने का। आशा है इस पहेली के उत्तर तक पहुंचने में आपके मनोरंजन के साथ कुछ ज्ञानवर्धन भी हुआ होगा जो कि इस श्रृंखला का उद्देश्य है।