Wednesday 1 July 2009

राशिद मियाँ सही कहा आपने, वाकई बादलों के ऊपर रब की दुनिया है !

कहते हैं आसमान की छत पर बादलों की चादर ओढ़े कोई फरिश्ता बसता है। अब कल ही देखिए ना अनुराग की ये पोस्ट पढ़ रहा था राशिद मियाँ प्रेसवाले के बारे में जो उनसे पूछ बैठे हैं...
आप तो हवाई जहाज में कई बार बैठे होगे .आसमान में...
हाँ क्यों ?
कुछ नहीं......वे हंसते हुए कपडे उठाते है. हमारी बेगम कहती है .. रब ऊपर बैठा है …फिर एक ठंडी सांस ..…"पगली है " ...

"मुए जहाजो से कहो कभी हार्न बजाये......

अपनी दुनिया को आसमान से ढक कर
तुम्हारा खुदा बड़ी बेफिक्री से सोया है
"

क्या खूब कहा अनुराग ने ! सोचता हूँ गर राशिद मियाँ ने यही सवाल मुझ से पूछा होता तो मैं क्या कहता ! नहीं, नहीं, कहने को कुछ नहीं बस उन्हें दिखाता कि आसमाँ की उस ऊँचाई पर बादलों के दूर दूर तक फैले श्वेत बिछौने पर उनके ख़ुदा को ढूँढना उतना ही मुश्किल है जितना की इस रंग रंगीली दुनिया में।

तो आइए दिखाएँ आपकों रब के साम्राज्य की एक झलक। इनमें से अधिकांश तसवीरें मैंने करीब दो साल पहले कोलकाता से राँची से आते हुए खींची थी। चित्रों को बड़ा करने के लिए उन पर क्लिक करें।











इन नज़ारों को चलता फिरता देखना चाहते हों तो यहाँ देखें...


video

वैसे अब तो आपको भी यकीन आ गया होगा ना कि कि रब की दुनिया वाकई पाक है !

14 comments:

अनिल कान्त : said...

खूबसूरत नजारे हैं

ओम आर्य said...

हसीन नजारे है ...............इन्द्रलोक लगता है भाई

राज भाटिय़ा said...

जनाब अगर आप को यह नजारा १०,१२घंटे देखना पडे तो पुछे.
सुंदर चित्र ओर सुंदर लेख.
धन्यवाद

Manish Kumar said...

राज भाई, आपका कष्ट समझ सकता हूँ, पर आपकी तरह लंबी उड़ानों की उकताहट को झेलने का अवसर नहीं मिला।

अभिषेक ओझा said...

अरे ऐसी कुछ तसवीरें तो हमारे पास भी है. आप ने भी कैमरा इस्तेमाल कर ही लिया :)

Udan Tashtari said...

बेहतरीन नजारा.

डॉ .अनुराग said...

ऐसा लगता है जैसे पाइलट को कहा हो...एक मिनट जरा साइड में रोकना .तनिक फोटू ले ले.....अच्छी स्नेप्स है ....वैसे अभिषेक का सवाल भी जायज है मनीष जी...

Manish Kumar said...

अभिषेक और अनुराग बहुत ज्यादा विमान यात्राएँ तो नहीं की हैं। पर जितनी भी की हैं उनमें यही संदेश दिया जाता है कि टेक आफ और लैडिंग के समय इलेक्ट्रानिक उपकरणों का प्रयोग ना करें। मोबाइल हमेशा बंद रखें।

इसीलिए टेक आफ के दस मिनट के बाद कभी कभी ये भी संदेश भी सुनने को मिलता है कि अब लैपटाप, कैमरे जैसे इलेक्ट्रानिक उपकरणों का प्रयोग किया जा सकता है। वैसे मेरा अनुभव इंडियन, इंडिगो, डेक्कन और जेट एयरवेज तक सीमित है।

कंचन सिंह चौहान said...

Rashid miyaN ke bahane hamne bhi kee asmaan ki sair...! :)

Anil Pusadkar said...

रब की हर तस्वीर कमाल की होती है।

विनीता यशस्वी said...

Kya khub nazaare hai...maza aa gaya...

Mridula said...

I like looking out of a plane window so much that I sulk like anything when I get any other seat. Lovely views.

रचना. said...

अहा मजेदार सैर बाद्लों के साथ!

Manish Kumar said...

इन चित्रों को पसंद करने के लिए आप सभी का धन्यवाद !

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