Monday 20 July 2009

कंक्रीट के जंगलों से हरे भरे खेत खलिहानों तक : देखिए कोलकाता और राँची के आस पास का ऊपरी परिदृश्य

उत्तर भारत में भले ही मानसूनी बादल आँख मिचौली कर रहे हों पर पूर्वी भारत में सावन जोरों पर है। ऍसे ही एक बरसाती दिन में कोलकाता से राँची आने का अवसर मिला। दोनों शहर आसमान की छत से कितना भिन्न परिदृश्य उपस्थित करते हैं ये आप इन चित्रों से आसानी से समझ जाएँगे।

कोलकाता से विमान उड़ता है तो कंक्रीट के जंगलों को चीरता हुआ तुरंत हुगली नदी के ऊपर मंडराने लगता है।





बादलों के बीच से दिखता हावड़ा ब्रिज और उसके ठीक दाँयी ओर हावड़ा का स्टेशन


कुछ ही देर में हम बादलों की दुनिया में हैं। पर राँची के पास आते ही विमान धीरे धीरे अपनी ऊँचाई को कम करता नीचे आने लगता है और फिर दिखती है सर्वत्र हरियाली। जी हाँ आखिर ये झारखंड की धरती है।







पर अब तो बारिश का मौसम आ गया है तो राँची के आस पास के खेत खलिहान एक दूसरी ही छटा लिए हुए हैं।

विकास की दौड़ जंगलों को हमसे दूर करती जा रही है। पर झारखंड में राँची क्या, कहीं भी जंगलों के बीच खेतों का ये दृश्य आम तौर पर दिखाई दे जाता है।

और जब बारिश झमाझम होगी तो धान की रोपनी कहाँ दूर रह सकती है।

झारखंड अभी भी विकास के पथ से काफी दूर है। हम सभी चाहते हैं कि हमारा राज्य आगे बढ़े पर ये विकास अपने आस पास की प्रकृति को नष्ट कर नहीं पर बल्कि एक सामंजस्य बिठाकर हो तो सही अर्थों में हम सब यहाँ की सामाजिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक विशिष्टता को अक्षुण्ण रख पाएँगे।
(चित्रों को बड़ा कर देखने के लिए उन पर क्लिक करें।)

12 comments:

Ravi Srivastava said...

मित्र, आज मुझे आप का ब्लॉग देखने का सुअवसर मिला।
वाकई आपने बहुत अच्छा लिखा है। khaaskar tasveeren bahut achchhi lagi...आशा है आपकी कलम इसी तरह चलती रहेगी और हमें पढ़ने को मिलेंगे, बधाई स्वीकारें।

आप के द्वारा दी गई प्रतिक्रियाएं मेरा मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन करती हैं।
आप के अमूल्य सुझावों का 'मेरी पत्रिका' में स्वागत है...

Link : www.meripatrika.co.cc

…Ravi Srivastava

annapurna said...

good photos !

नीरज गोस्वामी said...

सुन्दर फोटो...क्या बात है.
नीरज

डॉ .अनुराग said...

एक बार फिर बादलो के पार......

विनीता यशस्वी said...

Nice Pictures...

PN Subramanian said...

भू परिदृश्य बड़ा मोहक लग रहा है. बहुत ही सुन्दर चित्र. आभार.

अभिषेक ओझा said...

वाह !

Udan Tashtari said...

अच्छा लगा आकाश से नजारा धरती का.

अशोक पाण्डेय said...

बरसात के मौसम में झारखंड की हरियाली के बीच से गुजरना सचमुच अच्‍छा लगता है। सुंदर चित्र।

Mridula said...

Aap ke sare Hindi comments dekh kar English mein likhne mein sharam aate hai!

Khubsurat drishya hain!

Manish Kumar said...

इन चित्रों को पसंद करने के लिए आप सब का शुक्रिया।

मृदुला मैं ये मानता हूँ कि व्यक्ति को जिस भाषा में अपनी बात कहने में सहूलियत हो उसी का प्रयोग करना चाहिए। बाकी लोग हिंदी ब्लागिंग से जुड़े हैं, हिंदी साफ्टवेयर के जानकार हैं, इसलिए हिंदी में प्रतिक्रिया देते हैं ।

Cuckoo said...

Your pictures are as beautiful as your narration.

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