Monday, November 14, 2011

रंगीलो राजस्थान : कैसा दिखता है उदयपुर, सिटी पैलेस, मोती मगरी और सज्जनगढ़ से ?

पिछली पोस्ट में मैंने आपको सिटी पैलेस के चक्कर लगवाए थे। पर सिटी पैलेस में  सिर्फ अंदर के संग्रहालय को देखकर ही मन विस्मित नहीं होता बल्कि ऊपर के तल्लों से दिखने वाले दृश्य भी स्मृतिपटल पर हमेशा हमेशा के लिए क़ैद हो जाते हैं। तो आइए आज आपको ले चलें उदयपुर की उन जगहों पर जहाँ से पूरे शहर के कई अद्भुत नज़ारों का दीदार होता है।
जैसे ही हम सिटी पैलेस की सीढ़ियाँ चढ़ते हैं सबसे पहले हमें झरोखों से बड़ी पोल
और त्रिपोलिया गेट के दर्शन होते हैं और उसके पीछे दिखता है आज का उदयपुर....कंक्रीट के उन्हीं जंगलों के बीच, जो भारत के बढ़ते शहरों के पहचान चिन्ह बन गए हैं। फर्क बस इतना है कि इन जंगलों को आज भी अरावली की पहाड़ियाँ अपनी गोद में समेटे हुए हैं। चाहे जिस दिशा में भी देखें यही पहाड़ियाँ चारों ओर दिखाई पड़ती हैं। दरअसल इस शहर की पहचान भी यही हैं क्यूँकि ये पहाड़ियाँ ज्यादा हरी भरी ना भी हों पर इनका अस्तित्व यहाँ की झीलों की तरह मानसूनी बारिश पर निर्भर नहीं है।

पर उदयपुर आने के पहले हमें ये पता चल चुका था कि पिछले मानसून में वहाँ कई सालों के बाद जबरदस्त बारिश हुई है जिससे पिछोला और फतेहसागर झीलें अपने शबाब पर हैं। सिटी पैलेस में जाने से पहले भी यही आशा थी कि वहाँ से पिछोला तो जरूर दिखेगी।  कुछ ही देर में हम सिटी पैलेस के उस हिस्से में थे जहाँ से पिछोला झील और उसमें स्थित लेक पैलैस और जग मंदिर पैलेस दिखाई देते हैं। इन दोनों महलों में आंगुतक छोटी छोटी नावों में सवार होकर जाते हैं।

नीचे चित्र में आपको दिख रहा है जग मंदिर पैलेस जो कि पिछोला झील के दक्षिणी हिस्से में स्थित है। जग मंदिर का निर्माण सोलहवीं शताब्दी में महाराणा अमर सिंह ने शुरु कराया था। पर इसे इस रूप में लाने का श्रेय महाराणा करण सिंह और उनके पुत्र जगत सिंह को जाता है। ये वही जग मंदिर हैं जहाँ अपनी ताजपोशी के पहले मुगल बादशाह शाहज़हाँ ने जहाँगीर से बचने के लिए पनाह ली थी।

शहर के अधिकांश पुराने महल अब होटलों में तब्दील कर दिए गए हैं। ये महल बाहर से जितने भव्य दिखते हैं अंदर से उससे भी ज्यादा सुंदर है। कई विदेशी सैलानियों के यात्रा संस्मरणों में मैंने पढ़ा है कि इन होटलों में रहते हुए उन्होंने एक राजा सा होने का अनुभव किया। ज़ाहिर है कि ऐसे अनुभवों को प्राप्त करने के लिए आपको उतनी रकम खर्चनी होगी जितने में आप उदयपुर क्या पूरा राजस्थान घूम लें।

ऐसा नहीं कि लेक पैलेस उदयपुर का सबसे मँहगा होटल है। लेक पैलेस में एक कमरे का किराया जहाँ तीस से पैंतालिस हजार के बीच बैठता हैं वहीं इसके उत्तर पश्चिम में बने ओबेराय के इस उदयविला होटल के कमरे की कीमत तीस हजार से लेकर करीब तीन लाख प्रतिदिन तक की है।

पिछोला झील के इर्द गिर्द बने इन आलीशान महलों का दूर से ही अवलोकन कर हम मोती मगरी जा पहुँचे । इतिहासकार मानते हैं कि महाराणा उदय सिंह ने अपने पुत्र राणा प्रताप के जन्म की खुशी पर इस छोटी सी पहाड़ी पर मोती महल का निर्माण किया था। आज भी इस महल के अवशेष यहाँ देखे जा सकते हैं। पर मोती मगरी का मुख्य आकर्षण है यहाँ राणा प्रताप और उनके बहादुर और वफ़ादार घोड़े चेतक की काँसे की बनी प्रतिमा।


इस पहाड़ी की ढलान पर एक सुंदर उद्यान है। थोड़े नीचे राणा प्रताप के सेनापति हकीम खान सूर पठान की तोप के साथ एक और प्रतिमा है। हकीम खान बादशाह शेरशाह सूरी के वंशज थे और मुगलों से अपने पूर्वजों की हार का बदला लेने के लिए राणा से मिल गए थे।

महाराणा प्रताप मेमोरियल से फतेहसागर झील का दृश्य देखते ही बनता है। पिछोला झील के मुकाबले फतेहसागर झील शहर के कम भीड़ भाड़ वाले इलाके में है। अरावली की पहाड़ियों से घिरी इस झील को 1678 ई में महाराणा जय सिंह ने बनाया था। बाद में महाराणा फतेहसिंह ने इसका क्षेत्रफल बढ़ाते हुए इसका पुनः निर्माण कराया। मोती मगरी से होते हुए इस 2.4किमी लंबी इस झील का चक्कर लगाना एक बेहद आनंददायक अनुभव है। यहाँ नाव से पर्यटक इसके बीचों बीच स्थित नेहरू पार्क तक जाते हैं। हमारे पास नाव यात्रा का समय नहीं था क्यूँकि सूरज डूबने से पहले हमें उदयपुर के उत्तर पश्चिमी किनारे में स्थित सज्जनगढ़ तक पहुँचना था ।
मोती मगरी से सज्जनगढ़ पहुँचने में हमें करीब पौन घंटे लगे। शहर के बाहरी इलाकों से गुजरते हुए जब हमने बाँसडारा की 944मीटर ऊँची चोटी पर चढ़ना शुरु किया तो घड़ी की सुइयाँ चार बजा रही थीं।


सफेद संगमरमर से बने इस किले को महाराणा सज्जन सिंह ने 1884 में बनवाया था। महाराणा की असमय मृत्यु की वज़ह से नौ तल्लों के महल की आरंभिक परिकल्पना पूरी ना हो सकी। दरअसल सज्जन सिंह ने इतनी ऊँचाई पर जब इस महल का निर्माण किया तो उनकी मंशा यहाँ से मानसून के समय गुजरते बादलों की दिशा का अध्ययन करने की थी। इसी वज़ह से इस महल को मानसून महल के नाम से भी जाना जाता है। वैसे सज्जनगढ़ का महल राजस्थान के अन्य महलों की अपेक्षा बहुत साधारण सा है। अगर आप इसे संग्रहालय सोच कर देखने जाएँगे तो आपको निराशा होगी क्यूँकि महल के अंदर ऐसा कुछ भी नहीं है।



रात में सज्जनगढ़ किले को  रोशनी से जगमगा दिया जाता है और आप उदयपुर के किसी भी कोने से इसकी स्थिति का अनुमान लगा सकते हैं । यहाँ से पिछोला झील और उसके आसपास की अद्भुत इमारतों का दृश्य देखते ही बनता है। वैसे ये बताना आवश्यक होगा कि पिछोला का निर्माण शिशोदिया शासकों ने नहीं बल्कि लाखा महाराज के शासनकाल में 1362 ई में पिछू बंजारे ने किया। पिछोला उदयपुर की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी झील भी है। तीन मील लंबी और दो मील चौड़ी इस झील के पूर्वी किनारे के समानांतर सिटी पैलेस है जो नीचे चित्र में दिखाई दे रहा है। इसके उत्तरी छोर पर पुराना शहर और घाट हैं। दक्षिण हिस्से में जग मंदिर और ठीक मध्य में लेक पैलेस है। सज्जनगढ़ का किला इसके उत्तर पश्चिमी दिशा में है। किले से खींचे गए इस चित्र में बाँयी तरफ दिख रहा है लीला होटल...



पर अगर आपको ये लग रहा हो कि इन चित्रों के माध्यम से आपने उदयपुर की खूबसूरती का स्वाद चख लिया है तो आप मुगालते में हैं। उदयपुर की असली खूबसूरती प्रकट होती है जब सूरज नेपथ्य में अरावली की पहाड़ियों के बीच डूब चुका होता है और रात के घुप्प अँधेरे में ये खूबसूरत इमारतें रोशनी से नहा उठती हैं। अगली पोस्ट में आपको दिखाएँगे रात के उदयपुर के जगमगाते महलों की झाँकियाँ और साथ ही होगा इस बात का खुलासा कि आख़िर में मेवाड़ का असली महाराजा कौन है?

इस श्रृंखला में अब तक

9 comments:

  1. बहुत सुन्‍दर चित्रण है। मनीषजी आप जब सज्‍जनगढ़ से लौट रहे होंगे तब बिन्‍कुल मेरे घर के बाहर से निकले होंगे। काश आप मुझे पहले बताते। और चित्रों का इन्‍तजार रहेगा।

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  2. अनेकों बार इन स्थानों का भ्रमण किया है लेकिन आपके साथ घूमने का मज़ा ही कुछ और है...मनोरंजक और ज्ञान वर्धक पोस्ट

    नीरज

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  3. अजित गुप्ता जी अच्छा चलिए फिर कभी सही। उदयपुर जैसी जगहों में तो दोबारा आना भी अच्छा लगेगा।

    नीरज भाई सफ़र में साथ बने रहने का शुक्रिया !

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  4. बेहतरीन विवरण...चित्रण...आनन्द आ गया!

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  5. मनीष जी,
    बड़ा सुन्दर विवरण तथा छाया चित्र उससे भी बढ़कर. आपका कोई जवाब नहीं, आप सचमुच बेजोड़ हैं लाजवाब हैं. अगली पोस्ट के इंतज़ार में.
    मुकेश

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  6. I remember seeing this a long time back! The last picture is well composed.

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  7. चित्र अच्छे लगे. यात्रा का विवरण करने में तो आप बेजोड हैं ही !

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  8. Beautiful pictures and narrative. Udaipur and the whole of Rajasthan is so colorful.

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  9. राणा प्रताप के सेनापति का सूरी वंश से सम्बन्ध पता न था, जानकारी का आभार!

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